Monday, June 28, 2010

बदलाव और चाहत

बदलाव .... जो आप लाये
मुझे आज एक मुकम्मल शाम मिल गयी,
मेरी मसरूफ ज़िन्दगी में कुछ हसीं पल भर गयी,
थी शायद आज ये ज़िन्दगी भी मुझ पे कुछ मेहरबान....
मेरी तन्हाई में ये तेरी मुस्कराहट भर गयी!!



चाहत .... जो आप लाये
जानने में तुझे ये ज़िन्दगी बिताना चाहता हूँ,
बस एक बार, मैं खुद को आजमाना चाहता हूँ,
मुझे नहीं पता, हैं ये तेरी कशिश या दीवानगी मेरी,
मैं बस अपनी पहचान, तेरे नाम से बनाना चाहता हूँ!

Saturday, June 19, 2010

मेरी नादान कोशिश ...!!



हमने सुबकती आँखों को इस कागज़ पर,
उकेरने की नाकाम कोशिश की हैं.
हमने कांपते होठो की मद्धम आवाज़ को,
यहाँ एक गूँज बनाने की कोशिश की हैं....

बिन पीये हमे दीवानगी दिखी..
और हम थोड़ा सा बहक गए,
हमने उस खुमारी को ..बिन घुंघुरू के,
इस चक्कते पे नचाने की कोशिश की हैं!

मुश्ताक-ऐ-दीद थे उन दिनों हम,
नतीजा-ऐ-इश्क से अनजान थे,
हमने उन बेताब पलो की चोटो को
नासूर बनाने की पुरजोर कोशिश की हैं

निजात पा सके इस दौर से,
कभी ऐसा तसव्वुर ना रखा हमने,
हमने हर आते-जाते झोंके में,
उनकी छुअन महसूस करने की,ता-उम्र, कोशिश की हैं!

दिल में छुपे इस इश्क का,
हम कोई परचम नहीं चाहते..
आप चाहे जहां रहे..बस खुश रहे..
हर अता में.. हमने यही गुजारिश की हैं!

Friday, May 21, 2010

अब मैं बस... यही करता हूँ!



मेरे अलफ़ाज़, मेरी हकीक़त...... अब उनके कानो तक नहीं पहुचती,
इसलिए..... मैं दवात-ए-स्याही बर्बाद करता हूँ।

खून-ए-जिगर बन के आंसू.....बह चला आँखों से,
इसीलिए...... " उन " लम्हों को संजोकर, अब मैं हंसा करता हूँ।

इश्क था आप से तब भी.......अब भी........और.... ताउम्र रहेगा,
मैं आपकी यादो को, अपना हमसाया बना कर फिरता हूँ।

कल मर जाउंगा तो जल के भी...राख से आएगी तेरी ही खुशबु,
मैं आज भी, तुझे सीने से लगा कर सोता हूँ।

हो जाऊ मैं कितना भी आगे, मैं कितना भी सफल,
बिन तेरे मैं खुद को............अधूरा ही पाता हूँ।

मैं कमज़र्फ..खड़ा एक तरफ, सहता अकेले ये वक़्त के थपेड़े,
मैं ये तनहा सफ़र, .............अब तेरे साथ तय करना चाहता हूँ!

Thursday, May 6, 2010

ये... सयाने लोग


आये फिर मेरी महफ़िल में सयाने लोग,
कुछ कहने और कुछ समझाने आये लोग...

मैं करता हूँ बस "उनकी" प्यारी बातें,
आये हैं उनका रस लेने ...सारे लोग॥

अनजानी सी बातें कर के, मेरा दिल दुखाते वो,
फिर दिलासा देकर, चोट हरी करने वाले लोग

उनसे पुछू, क्या हैं इश्क का मतलब,
बगले झाँकते, मुंह ताकते..अनजाने लोग॥

धुँआ और राख मेरी बर्बादी का देख कर...
आये दबी हुयी आग को धधकाने लोग....

कहते हैं मुझसे- दिल का लगाना नहीं अच्छा..
खुद ही दिल को अक्सर तोडने वाले लोग॥

कहता हूँ मैं तो.."रहो मुझसे तुम परे"
नहीं चाहिए मुझे, इतने सयाने लोग...

Saturday, April 3, 2010

आपका तसव्वुर... मेरी दीवानगी


मेरी धड़कन और मेरे मन का दौर--इख्तिलाफ देखिये,
हम-नवां की यादो ने मुझे राही बना दिया॥

मुन्तजिर--हामी--सनम के इस लम्बे दौर में,
हमने ना कटते इस वक़्त को ही, अपना गुनाहगार मान लिया॥

मेरे हर अफसाने में झलकता है साया--हुस्न उनका,
रंग--हिना को हमने अब खून--जोश में है मिला लिया॥

तारीख--कयामत था, और खुदा खुद आये कासिद बनकर,
पता चला की जुदाई--सनम, मेरे नसीब में उसने लिख दिया॥

मुद्दा--मौत हो या ज़िन्दगी फिर सुरूर में आये,
हमने उनके तसव्वुर में, खुदी की हस्ती को भुला दिया॥

उम्मीद--बहार में है हम, जब वो होंगे जानिब हमारे,
हमने हर एक शमा को जलने को हाँ..... पर पिघलने को ना कह दिया...