Thursday, September 9, 2010

आपकी आँखों में बस...




कल रात, बहुत देर तक हम उन्हें सोचते रहे....
खुली आँखों के उजले सपनो में उन्हें ताकते रहे!
पड़ी सूरज की किरण आँखों पे तो पता चला सुबह हो गयी.......
हम आखिरी किरण के जाने तक, फिर पुरानी यादें ताज़ा करते रहे!


आँखों के बारे में सोचा तो हम नींद ही भूल गए,
छलके जो आब-ए-दीद, उनका भी पता ना चला..
हर लम्हा हर घडी वो देखती रही एक टक मेरी ओर....
उनमें डूबकर हमे इस दुनिया के पहरों का भी पता ना चला!


अश्को से लिखी, हमने उन आँखों की बातें,
ना जानी, ना समझी किसी ने... लिखी कुछ ऐसी बातें
रंग, साज़, खूबसूरती ....... और क्या होंगे इन से बढकर
बस खींच लेती हैं, मुझे खुद में.. आपकी वो दो आँखें!

Monday, September 6, 2010

अब और क्या कहू?




इस क़दर मैने आप से मोहब्बत की हैं,
मैंने दिल ही दिल में, तेरी परस्तिश की हैं!

साहिल से पूछ, क्यों बार बार वो लहरों से मार खाता हैं?
मैने साहिल की तरह, हरदम तेरा साथ देने की कसम ली हैं!

हो अगर पूछना, तो परवाने से उसका गम जान लेना,
मैने भी उसी की तरह, ये जिंदगानी तेरे नाम की हैं!

हो सके तो साँसों और धड़कन को जुदा करने की कोशिश करना,
मैने दिल में तेरी तस्वीर ऐसे छुपा के रखी हैं!

ज़ख़्म और दर्द का जितना पुराना है रिश्ता,इस जहां में,
मैं तेरा कर सकू उतना इंतज़ार, ये मैने गुजारिश की हैं!

हैं बात बहुत सीधी, पर लगती है थोड़ी मुश्किल,
मैने कर के "खुदा" से बगावत, दिल में तेरी रहनुमाई ज़िंदा रखी हैं!

Tuesday, August 24, 2010

तनहा मैं.....और.....ये दुनिया !!



मैं बारिश में भीगता, गीली आँखों के साथ जलता हूँ
लोग हमेशा मुझसे मेरी मुस्कराहट का राज़ पूछते हैं..

घिसी हुयी खड़ी से, उसके कम होने का कारण कोई क्यों पूछे??
सभी काली दीवार पर, अच्छी लिखाई को सराहते हैं..

दर-ब-दर भटकते परवेश का ठिकाना कोई क्यों मालूम करे?
मिल जाए जो वो रहम-दिल, तो दुआ-ए-ज़िन्दगी सभी चाहते हैं...

एक ग़मगीन शायर की तन्हाई.. को रहती है साकी की तलाश,
पर नासमझ.. बेवफा की बेवफाई को एक हसीं अदा मानते हैं!!

Tuesday, August 17, 2010

मेरी दोस्त :-)




हैं वो एक कली सी, एक महकते फूल सी,
लगती हैं इस युग में, भगवान् की कोई भूल सी,
इतनी प्यारी, नेक सीरत और मासूम हैं वो.....
हैं नहीं वो इंसान, वो हैं... फरिश्तो के मूल की!

हर वक़्त, हर बात पर वो अनजान सी दिखती हैं,
पर अनजान बातो पर, वो बात सधी सी कर जाती हैं
हैं, साफ़ दिल, जज़्बात, मन और जुबान उसकी,
फिर भी हर बात में, खुद से शर्मा जाती हैं!

कभी बच्चो सी मासूम बनकर, खुद पर इतराती हैं,
कभी अपने लड़कपन में, अपनी अदाओ पर इठलाती हैं.
वो पर हैं सादगी से भरी...इतनी भोली,
पल पल अपनी ही बातें सोचकर, उन पर ही सब को हसाती हैं!

खुदा लोग उसके जैसे, बस कुछ और बना दे,
फरिश्तो की ज़रूरत नहीं, लोग दोस्तों से ही काम चला ले,
क्या होगा इस दुनिया का, मुझे कोई फिकर नहीं....
मेरे लिए तो बस वो, तेरा साथ ताउम्र लिख दे!

Friday, August 6, 2010

हौसला बुलंद




मिलता अगर ये जहान मुकम्मल, तो इबादत कोई क्यूँ करता
मिलती अगर हर शह अपनी मुट्ठी में, तो कोई मेहनत ही क्यों करता,
चाहने वालो की चाहत हमेशा उनके दिलो में रहती है...
जो ना होती दिल में ही अगर ये चाहत, तो कुछ कर गुजरने की हसरत कोई क्यों करता

तोडे कई पहाड कईयो ने, तो मोडे कई दरिया किसी ने,
थी आरजू उनके दिल में, तो किये ऐसे हजार काम उन्होंने,
था दिल में बस एक ही जजबा ..कि पाना है अपनी हसरतो को,
उसके लिए खुदा तक को भी , मजबूर कर दिया उन्होंने!!

हो पक्का इरादा और दिल में एक भूख जीतने की,
तो छीन लेते है वो रौशनी भी आग की,
नज़र नज़र का फर्क होता है दोस्तों ऐसे लोगो में,
दिखती है जहां खाई किसी को, आशियाने बसा लेती है वहा भी जिंदगी...