Saturday, November 2, 2013

कविता




सोचता हूँ कैसे शुरुवात करू, इस अफ़साने का,
शुरुआत एक कविता की... कविता के इस अफ़साने का!
रहता है इंतज़ार.. बस उनकी आती missed calls का,
फिर बेताब हो जाता है मन, उसके पीछे के कारणों को जानने का!
अक्सर तो हम उन्हें सुना ही करते है,
उनकी बातो और हंसी में हम खो जाते है हाल इस ज़माने का!
कहना तो हम चाहते है बहुत कुछ उनसे...
पर उनकी आँखें देखकर भूल जाते है मकसद अपनी बातों का!
मुश्किल लग रहा है ये कुछ दिन काटना..
इंतज़ार के इन पलो को यूँ हथेलियों पे गिनना!
सोचता हूँ ज़रूर मेरे पिछले जनम के सबाब का आप फल होंगी,
इस जनम में तो मुझे याद नहीं आता कोई कारण, उस के इस प्रसाद का!
पहले हम तन्हाई में खुद को सोचा करते थे,
अब तो वक़्त ही नहीं मिलता, खुद को तुझसे बचाने का!
कभी कभी जो हम सोचते ही शायद आज खुश रहेंगे!
पर पूरा दिन निकल जाता है एक नयी धुन तुझ पर बनाने में!

Saturday, October 26, 2013

तुम.... धड़कन सी लगती हो!




तुम मुझे मेरे सीने में धड़कन सी लगती हो.
हो कर भी दूर, तुम मुझे करीब ही लगती हो!

तुम आफरीन..मेहफिशा...किसी कली सी...
तुम मुझे किसी और जहां की लगती हो!

तुम जाड़ो के मौसम में, एक लिपटी रजाई सी....
और गर्मी में तुम मुझे,"पुरवाई" सी लगती हो!

देखू तुझे तो, मैं सारी कायनात भूल जाऊ,
तुम मुझे रब का दिया एक तोहफा हसीन लगती हो!

लोग जा जा के मस्जिद, भी ना पा सके 'उस' को,
तुम मुझको बस.... उस जैसी लगती हो!

कैसे मैं बताऊ तुम्हे, तुम मुझे कैसी लगाती हो?????
तुम बस मुझे ... मेरे सीने की धड़कन सी लगती हो!

Tuesday, October 15, 2013

मेरी लगन





अब कैसे बताऊँ, तू मेरी क्या लगती हैं?
तू मुझे कुछ-कुछ.. अपनी सी लगती हैं!

तेरा वो.. हर छोटी-छोटी बात पे मुस्कुराना,
इन ही से तो ये दुनिया.. हमे हसीं लगती हैं!

तेरे होने से दुनिया थोड़ी अलग सी लगती हैं,
वरना, ये बस एक तनहा भीड़ सी लगती हैं!

होंगे रुखसत तो अलविदा ना कहना,
तेरे होने के ख्याल से ही ज़िन्दगी.. ज़िन्दगी लगती हैं!

हर नए बसंत के नये पत्ते.. नये नये फूलों की तरह,
तेरी हर मुलाक़ात, मुझे हर रोज़ .. एक नयी मुलाकात सी लगती हैं!

Monday, September 30, 2013

फिर एक बार .....



आज एक और शुरुआत की है, तेरे जाने के बाद,
आज फिर एक नयी याद बुनी है, तेरे जाने के बाद!

रोज़ सुनते रहे अपने दिल की कही, पर समझ ना सके,
आज फिर उन पे गौर करने की ठानी है, तेरी यादो के साथ!

आज फिर सोचा है, चलो ज़रा दिल को बहला लिए जाए,
फिर आँखें बंद कर के तेरा दीदार पा लेंगे, फिर उन यादो के साथ!

बड़ी सी इस दुनिया में, मेरा ये छोटा सा अफ़साना,
ये भी निखर जाएगा, नाम तेरा इस में जुड़ जाने के बाद!

Thursday, September 12, 2013

ध्यान रखना..




मेरी मानो, घर के चिरागों में दो चीज़े ज़रूर रखना,
अच्छी सोहबत और अच्छी आदत, तुम भी हमेशा अपने साथ रखना!

मेरी मानो, कभी कभी खुद को भी अपना समय दे के देखो,
वो जो तुम्हारा है, उसे सदा अपने पास रखना!

हमने देखा लोगो को गिरते हुए, उठते हुए, हर कदम दो कदम पे,
सीखा बस इतना ही की.. हर किसी का साथ देते हुए चलना!

दुनिया बहुत मतलबी है, कोई किसी को याद नहीं रखता,
तुम किसी को खुद को भूलने का बस मौका मत देना!

ज़िन्दगी बहुत छोटी है और उम्र और भी कम,
तुम हर मोड़ पे, एक नयी दास्ताँ बनाते हुए चलना!