Wednesday, April 10, 2013

मेरी आवारगी और मैं




कुछ ऐसी मेरी आवारगी है, जो शायद ही किसी के अरमान पूरे कर सके,
वरना हम तो बस इसीलिए सांस लेते है... कि बस एक उसूल पूरा कर सके!

बेपरवाह..बेपनाह.. बेइन्तिहा, इश्क किया जीवन ने,
शायद कोई कमी रह गयी थी कि अपने इश्क का वजूद ना पूरा कर सके!

हमने जिसे नजरो से पूजा, दिल से अपनाया था कल तलक,
आज.. कह तो दिया उन्हें खुदगर्ज़.... पर हरजाई ना मान सके!

आज भी नाम उनका आते ही, दिल में एक उम्मीद सुलग जाती हैं,
बना के भी खुद को आवारा, हम इस दिल को आवारगी ना सिखा सके!

मिलेंगे जो किसी मोड़ पे तो कोई शिकवा ना होगा लबो पे,
बस यही पूछेंगे कि बिन मेरे वो आज तलक जी कैसे सके!

बस यही आखिरी तमन्ना है मेरी .. मेरी कब्र के आखिरी मसीहाओं से,
मेरी आखिरी मिटटी जब भी उडे, उसे उनकी हथेलियाँ नसीब हो सके!

Saturday, March 30, 2013

सबको बता देना ..





एक सवाल के मानिंद मेरा एक जवाब यही कही फ़िर रहा था ,
जो तुम देखो उसे , तो उसे उसकी मंजिल बता देना !

तुम गैरों से पूछते हो पते , अपनो के पास जाने को ,
जो तुम देखो किसी ऐसे इंसान को , उसे अपना बना लेना !

आँखों में इंतज़ार लिए , पतझड़ में एक पत्ता और गिर गया ,
जो देखो तुम फूल नया बहार में , उसे वो कहानी बता देना !

उन बीती रातो की यादों में , कहने सुनने में , रात बीत जायेगी ,
होगी सुबह , तो आ के मुझे आज का हाल बता देना !

आवाज़े भी मौजूद हैं , और परछाईयों की आहट भी है निगाहों में,
मसरूफियत छोड़ के , इंसान की इंसान से एक बार पहचान करा देना !

Sunday, March 10, 2013

काश.. ऐसा ना हुआ होता !





काश तूने मुझे बेगाना ही रहने दिया होता,
तो शायद मेरा दिल इतना ना बेचारा होता!

खुश्बू-ए-इश्क मेरी ज़िन्दगी में आया तेरी ही वजह से ,
जो तू ना होता तो शायद मैंने धड़कन को ना जाना होता!

आँखों में पहले भी कई बार रतजगे आये थे,
पर तेरी याद ने तब मेरी पलकों को ना भिगोया होता!

हम तो आज भी किस्सा -ए -गम , दिल में दबाये बैठे हैं,
तेरी रूसवाई के डर ने, हमको ना चुप कराया होता!

यूँ तो साँसों की ये गिनती , कभी रास नहीं आई मुझको,
पर इन खुली आँखों में हरदम तेरा बेसब्र इंतज़ार नहीं होता!

Saturday, February 16, 2013

वो बच्चा जिसका आंसू गिरा




क्या तुमने अपनी हसीँ यों जाया की हैं?
तो क्यों उस मासूम के हाथो को छलनी करवाया!

अपनी तो हर जिद के लिए तुमने दुनिया झुका दी,
फिर क्यों तुमने उसकी दुनिया से बचपन निकलवाया!

वो भी एक सपना लिये जागता था... एक विश्वास रखता था,
क्यों तुमने उसकी उम्मीदों को उसका ही खोया ख्वाब बना दिया!

फितरत में उसकी कुछ नादानियां थी.. ज़ेहन में कुछ शरारते थी,
पर तुमने सबको हटाकर, उसकी हथेलियों .. कंधो पे बोझ डाल दिया!

उसका मन था परदे सा, बिना किसी रंग या तस्वीर का,
तुमने क्यों उस परदे पे, उसी का स्याह रंग उड़ेल दिया!

अपनी हंसी को तुमने ख़ुशी का एहसास.. एक याद बना के रखा,
पर उसके हंसने को उसकी मजबूरी का तमाशा बना दिया!

अपनी औलाद के एक जिद्दी आंसू के लिए तुमने तारे भी ज़मी-दोज़ कर दिए,
और किसी मासूम की आत्मा में तुमने आंसूओ के सैलाब पैदा कर दिया!

अपने रब से तुमने सदा अपनों की सलामती मांगी,
और .. उस मासूम का तू ... खुद ही खुदा बन गया!

Thursday, February 7, 2013

क्या, ऐसे खुश रह पाओगे?





हमारी शून्य जैसी और आपकी भागती-दौड़ती ज़िन्दगी,
हमारी इस तरह और आपकी उस तरह कट ही जायेगी!

कुछ पाकर... जिनके लिए पाया, उनको खोना,
क्या तेरी ताबीर तुझे ऐसे खुश रह पायेगी!

वक़्त-बेवक्त की शामते, पल-पल की परेशानियां,
क्या ये बैचैनियाँ तुझे तेरी मंजिल तक ले जा पायेंगी!

परेशान हो या बेफिक्र रह, ये सब तो तेरे हाथ में ही हैं,
जो होनी है,ना चाहने पर भी ... वो हो ही जाएगी!