जो देखा, वो लिखा...... यूँ ही अपना सफ़र चलता रहा!
सीखा जो सिखाया... मैं यूँ ही बस चलता रहा!
करने को तो, मैं भी रहगुज़र कर सकता था किसी एक कोने में,
पर मेरा सफ़र........
हर मोड़ पर, मुझे हर बार एक नया एहसास सिखाता रहा!
Tuesday, August 20, 2013
नादानियाँ
देखने से उनको दिल को करार आ जाता है,
पर वो नज़र छुपा रहे हैं,
सुन के उनके बोलो को सुरूर छा जाता है,
पर वो खामोश बैठे हैं,
अब तो इंतिहा हो गयी, इंतज़ार और ऐतबार की...
चाहने की उनको तमन्ना तो बहुत हैं,
पर वो मेरे इश्क से मुह फेरे बैठे हैं!
हमने उनकी तस्वीर हर और लगा रखी है,
अपनी पहचान भी उन्ही के नाम से ही रखी हैं,
ऐसी ही कई नादानियो की ...
हमने अब आदत बना रखी हैं!
बुत कहते हैं, अकेले कैसे काटोगे ये ज़िन्दगी,
हमने अपनी तन्हाईयों को संजोकर,
अब उनकी महफ़िल सज़ा रखी हैं!
Monday, August 5, 2013
मुझे छोड़ के जाने वाला!
इनकार नहीं,
इकरार नहीं..
इंतज़ार दे गया,
मुझे छोड़ के जाने वाला!
सरफराज था,
दिलनवाज है,
चाहे जैसा भी था,
वो.. मेरा दिल तोड़ने वाला!
आँखें कशमकश में नम हुई,
लब भी कोशिश करते रहे,
पर बयाँ ना कर सके,
ग़म ... वो मेरे दिल को छिलने वाला!
आह सही..
आह भरी..
फिर भी ना आया कोई,
मेरी तकलीफ सुनने वाला!
नहीं कोई रुलाने वाला,
नहीं कोई सताने वाला,
दूर तलक नहीं कोई निगाह में,
कोई, मुझे कुछ बताने वाला!
इनकार नहीं,
इकरार नहीं..
कुछ और ना सही,
इंतज़ार सही!
Wednesday, July 17, 2013
तेरा खुदा-मेरा खुदा
क्या मेरे काफिर होने से तेरे खुदा को कोई गुरेज़ होगा,
आखिर मुझे भी तो ... उसने ही अपने हाथों से बनाया होगा!
मानने वालो का कहना है की हर शह में वो रहता हैं,
क्या मुझे रुलाने वालो ने, इतना भी ना जाना होगा!
बुत-परस्तों का मुझे यूँ नादानों की तरह पत्थर मारना,
उनका खुदा भी तो ... कहीं इन में ही रहता होगा!
काबा किये, मदीने गए, पढी इन्होने कई आयतें,
क्या ना देख पाने वालो को, खुदा ने काफिर बनाया होगा!
फक्र है उनको अपने मुस्तकबिल पर, जो खुदा को अपना कहते हैं,
क्या उन्होंने खुद की मुट्ठी को, खुदा की दरियादिली से बड़ा माना होगा!
Friday, July 5, 2013
तेरा-मेरा
हे राम, या अल्लाह, ओ गुरु जी, Oh Jesus
वो तो बस एक ही है, पर इंसान कहता है... ये तेरा है, वो मेरा हैं!
दिन रात की ये कशमकश, ता-उम्र ढोयी कठिनाईयाँ,
ना चैन देखा, ना नींद अपनी... बस कहते रहे, ये तेरा है, ये मेरा है!
छोड़ ना सके ताउम्र, छोटी-छोटी चीज़ों की ज़द्दो-जेहद,
वो तो मौत पर भी अपनी लड़ते रहे... ये तेरा है, ये मेरा है!
लड़-झगड़ के हमने कर दिए, एक ज़मीन के कई टुकड़े,
अब मिल के रोते है उस कोने पर... जो न तेरा है, ना मेरा है!
बरसात का ये मौसम फिर भिगोने चला आया,
आओ चले खेले उस पानी में... जो ना तेरा है, ना मेरा हैं!
आओ छोड़ के कि क्या तेरा है, क्या मेरा हैं,
दुआ करे उसके लिए... जो ना तेरा हैं, ना मेरा हैं!
Saturday, June 22, 2013
चाहत की इंतिहा
तुझे कुछ इस कदर अपने दिल से मांग के चाहा हमने,
अपने अधूरेपन के हर आखिरी हिस्से से तुम्हे चाहा हमने!
आँखों के आँसू ... तेरी यादों में सब सूख चुके थे,
लहू को आंसू बनाकर, फिर से यादो को गले लगाया हमने!
दिल की बस्ती, गम का मंज़र और मैं भटकता आवारा,
तेरे नाम का सहारा लेकर, फिर बेखुदी का कदम बढाया मैंने!
किसी ने किनारा किया तो किसी ने सिर्फ रंग दिखाए,
तेरे नाम का सहारा लेकर, उन सबसे किनारा किया हमने!
अब वो भी नहीं रहा मेरा, जिसे सब खुदा कहते हैं,
होगा भला सोच के.. इस बार सदके में तेरे नाम को अपनाया हमने!
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